जबलपुर–मंडला की धरती आज गवाह बनी उस ऐतिहासिक शौर्य की
जबलपुर–मंडला की धरती आज गवाह बनी उस ऐतिहासिक शौर्य की, जहां 168 साल पहले पिता–पुत्र की जोड़ी ने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का बिगुल फूंका और तोप से उड़कर भी अमर हो गए। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बलिदान दिवस पर उनके अमर योगदान को नमन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्म और मौत तो एक बार होते हैं, लेकिन जो अपने जीवन को देश के नाम कर दे, वो मौत नहीं… बलिदान कहलाती है।
👉 राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने रानी दुर्गावती की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अंग्रेजों की तीन शर्तें ठुकरा दीं – धर्म बदलो, सत्ता स्वीकार करो और विरोध छोड़ दो।
👉 पिता–पुत्र ने कहा – चाहे जो हो जाए, न सत्ता स्वीकार करेंगे, न धर्म बदलेंगे और न ही विरोध छोड़ेंगे।
👉 अंग्रेजों ने बिना मुकदमे और बिना प्रक्रिया अपनाए उन्हें तोप से उड़ा दिया। उस समय रघुनाथ शाह ने कहा था – "देखते हैं, तुम्हारी तोप में कितना दम है?"
👉 मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बलिदान हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
👉 हमारी सरकार ने रानी दुर्गावती और राजा शंकर शाह–रघुनाथ शाह के स्मरण में कई कार्य किए हैं। मंडला किले मेंभी उनके बलिदान को अमर स्मृति दी गई है।
👉 जबलपुर नगर निगम ने उनके लिए छत्र का निर्माण किया है।
👉 मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के स्वदेशी अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वदेशी अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

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