11 करोड़ साल पहले धरती पर रहता था ये जानवर, खुदाई के दौरान अचानक निकल आया
आटोवा। कनाडा की खदानों में काम करने वाले खनिकों ने डायनासोर का ऐसा जीवाश्म खोजा है, जिसे वैज्ञानिक ‘जीवित ममी बता रहे हैं। यह खोज अब तक के सबसे सुरक्षित संरक्षित डायनासोर जीवाश्मों में से एक मानी जा रही है। इसमें न केवल त्वचा और कवच पूरी तरह सुरक्षित हैं, बल्कि आंत जैसे आंतरिक अंग भी संरक्षित अवस्था में मिले हैं, जिससे 11 करोड़ साल पुराने इस जीव के शरीर रचना और जीवनशैली की अनोखी झलक मिलती है। यह जीवाश्म अल्बर्टा स्थित रॉयल टायरल म्यूजियम में रखा गया है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि यह जीव नोडोसॉर परिवार का था। ये भारी-भरकम, कवचधारी शाकाहारी डायनासोर थे जो क्रेटेशियस युग में पृथ्वी पर रहते थे। इसकी हालत इतनी बेहतरीन है कि विशेषज्ञों ने इसके मूल स्वरूप को पुनर्निर्मित कर लिया है, जिसमें त्वचा के पैटर्न और मुलायम ऊतक तक साफ दिखाई देते हैं। यह खोज पूरी तरह अचानक हुई। कनाडा के फोर्ट मैकमरे के पास सनकोर मिलेनियम माइन में काम कर रहे मजदूर जब ड्रिलिंग कर रहे थे, तब उन्हें कोयले या चट्टान की बजाय यह जीवाश्म मिला।
रिपोर्टों के अनुसार, जीवाश्म में न केवल बाहरी त्वचा संरचना दिखाई दे रही है, बल्कि हड्डियाँ भी पूरी तरह जुड़ी हुई अवस्था में हैं। आंतरिक अंगों के अवशेष भी स्पष्ट हैं। जीवित अवस्था में यह डायनासोर करीब 1,400 किलोग्राम वजन का रहा होगा, जबकि जीवाश्म स्वरूप में इसका वजन करीब 1,100 किलोग्राम है जो यह दिखाता है कि ये कितनी अच्छी तरह संरक्षित है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह डायनासोर किसी जलाशय के किनारे मरा और उसका शरीर समुद्र की तलहटी में जा बसा। वहां मौजूद खनिज तत्वों ने बहुत तेजी से इसके शरीर को ढक लिया, जिससे सड़न शुरू होने से पहले ही उसका बाहरी आवरण और अंदरूनी संरचना दोनों सुरक्षित रह गए। रॉयल टायरल म्यूजियम के पेलिओन्टोलॉजिस्ट डॉन हेंडरसन के अनुसार, ‘इस जीवाश्म में हड्डियों के साथ अब भी मुलायम ऊतक चिपके हुए हैं। यह डायनासोर की खोजों में लगभग असंभव स्थिति है। शोधकर्ताओं को इसके पेट के हिस्से में पूर्ण रूप से संरक्षित आंतें मिली हैं, जो अब तक किसी भी नोडोसॉर में पहली बार देखी गई हैं। इससे वैज्ञानिकों को इस प्रजाति के पाचन तंत्र को समझने में बड़ी मदद मिली है।

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