नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के मौजूदा संकट का असर अब भारत की उर्वरक आपूर्ति पर भी पड़ता दिखाई दे रहा है। इसी के चलते सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए एक ही टेंडर के माध्यम से रिकॉर्ड 25 लाख टन यूरिया आयात करने का निर्णय लिया है। विशेष बात यह है कि इस बार यूरिया की खरीदारी दो महीने पहले की तुलना में लगभग दोगुनी कीमतों पर की जा रही है। यूरिया की यह बड़ी खेप भारत के कुल वार्षिक आयात का करीब एक-चौथाई हिस्सा है।

कीमतों में भारी उछाल

बाजार सूत्रों के अनुसार, इंडियन पोटाश लिमिटेड ने पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की दर से यूरिया खरीदने पर अपनी सहमति दी है। यदि इसकी तुलना पिछले टेंडर से की जाए, तो उस समय कीमतें प्रति टन 508 से 512 डॉलर के आसपास थीं। मात्र दो महीने के भीतर कीमतों में आया यह भारी उछाल वैश्विक बाजार में उर्वरक की बढ़ती किल्लत और ऊँची मांग को दर्शाता है।

टेंडर और आपूर्ति की स्थिति

प्रस्ताव: कंपनी को कुल 56 लाख टन आपूर्ति के प्रस्ताव मिले थे, लेकिन अधिकांश बोलियां 1,000 डॉलर से लेकर 1,136 डॉलर प्रति टन तक बेहद ऊँची थीं।

  • सहमति: आपूर्तिकर्ताओं द्वारा न्यूनतम बोली की बराबरी करने के बाद ही 25 लाख टन के ऑर्डर को अंतिम रूप दिया गया।
  • डेडलाइन: टेंडर की शर्तों के तहत इस पूरी खेप को 14 जून 2026 तक लोडिंग पोर्ट से रवाना करना अनिवार्य है।

वैश्विक और घरेलू बाजार पर प्रभाव

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में यूरिया सुरक्षित करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अन्य देशों के लिए आपूर्ति की चुनौती बढ़ सकती है। उत्पादकों का बड़ा हिस्सा भारत की मांग पूरी करने में व्यस्त रहेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर कीमतें और बढ़ने की आशंका है। साथ ही, महंगे आयात के कारण घरेलू स्तर पर भी यूरिया की लागत बढ़ सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र और किसानों के बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।