बेमेतरा: छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां आयोजित सरकारी 'सुशासन तिहार शिविर' में एक पीड़ित युवक ने सड़क न बनने से नाराज होकर सीधे प्रशासन से हेलीकॉप्टर की मांग कर डाली। युवक का कहना है कि सालों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने और लगातार शिकायत करने के बाद भी जब गांव की बदहाल सड़क नहीं सुधरी, तो थक-हारकर उसने शासन-प्रशासन की नींद उड़ाने और उनका ध्यान इस ओर खींचने के लिए यह अनोखा रास्ता चुना।

'जब तक सड़क न बने, तब तक के लिए दे दें हवाई जहाज'

यह दिलचस्प मामला साजा विधानसभा क्षेत्र के गाड़ाडीह गांव का है, जहां सरकार की लोक-कल्याणकारी योजनाओं के तहत सुशासन तिहार कैंप लगाया गया था। इस शिविर में गांव के ही रहने वाले राजकुमार नाम के युवक ने लोक निर्माण विभाग (PWD) के काउंटर पर जाकर एक अजीबोगरीब आवेदन सौंप दिया। राजकुमार ने अपने आवेदन में लिखा गाड़ाडीह से नवकेशा हाई स्कूल जाने का मुख्य मार्ग पूरी तरह से जर्जर और बदहाल हो चुका है। कई बार गुहार लगाने के बाद भी इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब चूंकि बारिश का मौसम सिर पर है, इसलिए जब तक सरकार इस सड़क का निर्माण नहीं करा देती, तब तक के लिए मुझे और ग्रामीणों को आने-जाने के लिए एक हेलीकॉप्टर या हवाई जहाज उपलब्ध करा दिया जाए, ताकि हम कीचड़ और जलभराव से बच सकें।"

"आवेदन देते-देते चप्पलें घिस गईं, पर सड़क नहीं बनी"

अपना दर्द बयां करते हुए पीड़ित युवक राजकुमार ने कहा कि वे लोग पिछले कई सालों से इस महत्वपूर्ण सड़क को पक्का बनवाने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए ग्रामीणों ने दर्जनों बार सरकारी दफ्तरों और बड़े अधिकारियों के चक्कर काटे हैं। अफसरों को आवेदन देते-देते उनकी चप्पलें तक घिस गईं, लेकिन व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। राजकुमार ने तंज कसते हुए कहा कि जब सरकार एक छोटी सी सड़क बनाने में असमर्थ है, तो उसे हमें हेलीकॉप्टर ही दे देना चाहिए ताकि हमारी रोजाना की मुश्किलें हमेशा के लिए खत्म हो जाएं।

बारिश के आते ही तालाब बन जाता है रास्ता, ग्रामीण परेशान

इस समस्या को लेकर पूरे गांव के लोगों में प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि इसी खतरनाक और गड्ढों से भरे रास्ते से होकर छोटे-छोटे मासूम बच्चे रोज स्कूल जाने को मजबूर हैं और ग्रामीण भी अपने काम पर निकलते हैं। मानसून की शुरुआत होते ही यह पूरी सड़क एक तालाब का रूप ले लेती है, जिससे राहगीर आए दिन फिसलकर चोटिल होते रहते हैं। अब देखना होगा कि युवक के इस अनोखे 'हेलीकॉप्टर वाले आवेदन' के बाद क्या बेमेतरा जिला प्रशासन की नींद टूटती है और गाड़ाडीह गांव की किस्मत बदलती है या नहीं।