देशभर में प्रसिद्ध है देवास के दिल में स्थित प्रसिद्ध माता टेकरी, जहाँ नवरात्रि पर्व पर उमड़ता है आस्था का सैलाब......भक्तों की मुरादें पूरी करती है माँ......
वीकेंड पर शनिवार को उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घण्टे में माताजी टेकरी पर पहुँचे 2 लाख से ज्यादा भक्त... अल सुबह तक रही भीड़...

देवास शहर के दिल में स्थित माता टेकरी पर हजारों साल पुराना माँ तुलजा भवानी और माँ चामुण्डा देवी का मंदिर मालवा या म.प्र. ही नहीं बल्कि देशभर में प्रसिद्ध है। इसे माता टेकरी के नाम से जाना जाता है ......
यहाँ टेकरी पर पहाड़ के दोनों ओर देवी माँ के दो स्वरूप अपनी जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को बड़ी माता- माँ तुलजा भवानी और छोटी माता- माँ चामुण्डा देवी के नाम से जाना जाता है......
देवी - देवताओं का वास होने की वजह से ही शहर का नाम "देवास" पड़ा  ........ शारदीय नवरात्रि पर्व और चैत्र नवरात्रि पर यहाँ श्रद्धा का सैलाब उमड़ता है ......................
यहाँ देवी माँ की पूजा अर्चना का सिलसिला सैकड़ों वर्षों से सुबह - शाम लगातार चला आ रहा है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहाँ आकर जो भी मनोकामना की जाती है वह जरूर पूरी होती है।

देशभर में देवास की पहचान और आस्था  एवं  श्रद्धा का प्रमुख केंद्र है  माता टेकरी  .............
टेकरी पर प्राक्रतिक सौंदर्य की छटा एवं  पुरे शहर का नजारा  देखते  ही बनता है ............. साथ ही टेकरी की पूर्ण परिक्रमा भी परिक्रमा मार्ग पर भक्तों द्वारा अपने आप पूर्ण हो जाती है। भक्त टेकरी के जिस स्थान  से अपनी यात्रा प्रारंभ करता है  परिक्रमा पूर्ण होने के बाद फिर से वहीं पहुंच जाता  है।
टेकरी पर माँ तुलजा भवानी बड़ी माता और माँ चामुंडा देवी छोटी माता के अलावा - श्री हनुमान, भैरव गुफा, कालका माता, अन्नपूर्णा माता, कुबेर देव, जैन मंदिर, खो खो माता आदि के स्थान भी धार्मिक मान्यताओं और सिद्ध स्थान के रूप में मौजूद है।

तकरीबन हजार वर्ष पूर्व चंदबरदाई द्वारा लिखित महाकाव्य "पृथ्वीराज रासो" में भी देवास की दोनों ही माताओं का वर्णन है। जो कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान के जीवन पर लिखा गया है।
बताया जाता है कि पृथ्वीराज चौहान अपने राजकवि चंदबरदाई  के साथ यहाँ आये थे।
यहाँ पर उज्जैयनी के राजा भर्तहरी ने तपस्या की थी उन्हें यहीं  से ज्ञान की प्राप्ति हुई और फिर कई ग्रंथों  की रचना की ...... माता टेकरी नाथ सम्प्रदाय की तपोभूमि रही। महान तपस्वी  शीलनाथ जी महाराज ने भी यहाँ साधना की।

ऐसी मान्यता है कि जिस महिला को संतान नहीं होती है अगर वह महिला यहाँ आकर  सच्चे मन से माथा टेके तो उसकी गोद भर जाती है ................. मान्यता के मुताबिक बड़ी माता तुलजा भवानी और छोटी माता चामुंडा माँ के मुँह में पान का बीड़ा देने पर अगर वह  महिला भक्त की झोली में  आकर गिर जाता है तो उसे माताजी के आशीर्वाद स्वरुप संतान की प्राप्ति होती है।

यहाँ पर शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्रि के आलावा भी वर्ष भर  देश के कोने - कोने से आने वाले भक्तों का ताँता  लगा रहता है...............
माता अपना रूप भी दिन में तीन बार परिवर्तित करती है और यह साक्षात चमत्कार  भक्त महसूस भी करते है  । सुबह बाल  स्वरुप में माँ अपने भक्तों को दर्शन देती है , दोपहर में युवा स्वरुप माँ का दिखाई देता है, और शाम को वृद्ध स्वरुप में माँ के दर्शन होते है।

यहाँ के पुजारी बताते हैं कि बड़ी माँ और छोटी माँ के मध्य बहन का रिश्ता था। एक बार दोनों में किसी बात पर मनमुटाव हो गया। विवाद से क्षुब्द दोनों ही माताएँ अपना स्थान छोड़कर जाने लगी। बड़ी माँ तुलजा भवानी पाताल में समाने लगी और छोटी माँ  चामुंडा अपने स्थान से उठ खड़ी हो गई और टेकरी छोड़कर जाने लगी। माताओं को कुपित देख माताओं के साथी (माना जाता है कि बजरंगबली माता का ध्वज लेकर आगे और भेरूबाबा माँ का कवच बन दोनों माताओं के पीछे चलते हैं) हनुमानजी और भेरूबाबा ने उनसे क्रोध शांत कर रुकने की विनती की। इस समय तक बड़ी माँ का आधा धड़ पाताल में समा चुका था। वे वैसी ही स्थिति में टेकरी में रुक गईं। वहीं छोटी माता टेकरी से नीचे उतर रही थीं। वे मार्ग अवरुद्ध होने से और भी कुपित हो गई और जिस अवस्था में नीचे उतर रही थीं, उसी अवस्था में टेकरी पर रुक गई।  यानि  आज भी पहाड़ में समाई  हुई है माता चामुण्डा........

इस तरह आज भी दोनों ही माताएँ अपने इन्हीं स्वरूपों में विराजमान हैं। ये मूर्तियाँ स्वयंभू हैं और जागृत स्वरूप में हैं। सच्चे मन से यहाँ जो भी मन्नत माँगी जाती है, हमेशा पूरी होती है। शहरवासी हिन्दू - मुस्लिम भाईचारे को  माता जी का आशीर्वाद मानते है ..................
इसके साथ ही देवास के संबंध में एक और लोक मान्यता यह है कि यह एक ऐसा शहर है, जहाँ दो शासक राज करते थे। बड़ी माता तुलजा भवानी देवास जूनियर रियासत की कुलदेवी है। तो वहीं छोटी माता चामुंडा देवी देवास सीनियर राजघराने की कुलदेवी है। देवास की छोटी माता यहाँ के पवार राजघराने की कुलदेवी होकर आस्था और अटूट विश्वास का प्रमुख केंद्र है ........ छोटी माता प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय तुकोजीराव पवार के घराने की कुल देवी है। आज भी राजघराना माताजी टेकरी पहुंचकर पूरे श्रद्धा भाव से दोनों ही माता रानी की पूजा अर्चना करता है। वर्तमान में देवास से भाजपा विधायक गायत्रीराजे पवार राजघराने की राजमाता है।

टेकरी में दर्शन करने वाले श्रद्धालु बड़ी और छोटी माँ के साथ-साथ भेरूबाबा के दर्शन अनिवार्य मानते हैं। नवरात्रि पर्व के दौरान यहाँ दिन-रात लोगों का ताँता लगा रहता है। इन दिनों यहाँ माता की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु अपनी मन्नतें मांगने और उनके पूरी होने पर कोई नंगे पैर तो कोई घुटने  के बल  माता रानी के दरबार में चला आता है।

पहाड़ी पर स्थित माँ का यह प्रसिद्द स्थान जग प्रसिद्द होने के साथ - साथ सिद्ध भी है।
नवरात्रि के नौ दिन यहाँ आस्था और श्रद्धा का अटूट सैलाब उमड़ता हैं । देश-प्रदेश और अंचल से लाखों की तादाद में भक्त पैदल या अपने वाहनों से माता के दर्शन को आते हैं । इस दौरान यहाँ जिला पुलिस प्रशासन के द्वारा सुरक्षा व्यवस्था के पुख़्ता बंदोबस्त किए जाते है।

वैसे तो नवरात्रि पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें पश्चिम बंगाल का ख़ास स्थान है, लेकिन बंगाल के दुर्गा पूजन महोत्सव की तरह ही मप्र के देवास में नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। प्रसिद्ध माता टेकरी पर माँ तुलजा भवानी-चामुंडा माता विराजित है ही मगर शहर के चौराहों पर आकर्षक पंडाल सजाकर माता प्रतिमाएं विराजित की जाती है।इस दौरान दिन-रात पूरा शहर शक्ति की भक्ति में लीन रहता है। चारों ओर जय माता दी के जयकारे सुनाई देते हैं और माता भजनों से वातावरण भक्तिमय होता है। जगह-जगह भंडारे,प्रसादी का दौर चलता रहता है।
इस वर्ष शारदीय नवरात्रि पर्व के दौरान लाखों श्रद्धालुओं ने माताजी टेकरी पहुंचकर दर्शन किए।

वीकेंड पर शनिवार को माता टेकरी पर सुबह से ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था जो कि रात करीब 10 बजे तेजी से बड़ा और फिर रातभर चला। टेकरी पर 24 घण्टे में 2 लाख से ज्यादा भक्तों ने दोनों माता के दर्शन किए। इस दौरान व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के लिए कलेक्टर ऋतुराज सिंह और एसपी पुनीत गेहलोद ने अपनी टीम के साथ रातभर नज़र बनाए रखी। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसे लेकर पुलिस प्रशासन ने शंख द्वार के जिगजैग और माता टेकरी पर श्रद्धालुओं को कुछ देर रोक कर दर्शन के लिए आगे भेजा...
कलेक्टर ,एसपी की नई टीम ने इस बार भी बाहर से आने वाले श्रद्धालु सुलभ दर्शन कर सके। इसके लिए सुरक्षा और यातायात प्रबन्धन की दृष्टि से पुख्ता बंदोबस्त किए हुए हैं।