NEET काउंसलिंग विवाद गहराया: DigitalBell की Part-2 रिपोर्ट
NEET काउंसलिंग विवाद गहराया: DigitalBell की Part-2 रिपोर्ट और रीवा कनेक्शन ने खोले बड़े राज — अब यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित और संरक्षित घोटाले का संकेत
मध्यप्रदेश में NEET काउंसलिंग को लेकर जारी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा। DigitalBell की पहली रिपोर्ट के बाद अब Part-2 में सामने आए तथ्य यह सिद्ध करते हैं कि यह मामला मात्र एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक गहरी जड़ें जमा चुके संगठित नेटवर्क का परिणाम है। NSUI और छात्रों के आरोपों ने काउंसलिंग प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
🔴 DME की मुख्य ई-मेल ID के दुरुपयोग का विस्फोटक आरोप
छात्रों ने आरोप लगाया है कि DME की मुख्य ई-मेल ID का नियंत्रण एक विवादित कर्मचारी के हाथों में है, जिसकी भूमिका पहले से संदिग्ध रही है। उनके अनुसार—
छात्रों की शिकायतें जानबूझकर डिलीट की जाती हैं
महत्वपूर्ण ई-मेल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुँचने ही नहीं दी जातीं
जिन शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई ज़रूरी है, उन्हें ब्लॉक या इग्नोर कर दिया जाता है
छात्रों का कहना है—
“ई-मेल सिस्टम का दुरुपयोग सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि मेधावी छात्रों के भविष्य का योजनाबद्ध दमन है।”
🔴 Stray Round: हेराफेरी का सबसे बड़ा केंद्र
Part-2 की रिपोर्ट में Stray Round को पूरे विवाद का सबसे संवेदनशील बिंदु बताया गया है। आरोप इस प्रकार हैं—
सीटें पहले रोकी गईं, फिर “चुनिंदा छात्रों” को अलॉट
निजी मेडिकल कॉलेजों के साथ मिलीभगत
उच्च मेरिट वाले छात्रों को बाहर रखकर कमज़ोर मेरिट वाले छात्रों को लाभ
छात्रों के शब्दों में—
“ये Seat Trading है।”
छात्रों ने स्क्रीनशॉट और कॉल रिकॉर्डिंग जैसे प्रमाण भी जुटाए हैं।
🔴 शिकायत लेकर आने वाले छात्रों को डराया-धमकाया जाता है
नई शिकायतें यह भी बताती हैं कि जब छात्र DME कार्यालय पहुँचते हैं, तो यही विवादित कर्मचारी—
उन्हें डाँटता,
धमकाता,
मानसिक दबाव बनाता,
और सरकारी प्रक्रिया छोड़ कर काउंसल्टेंसी या मैनेजमेंट सीट की ओर धकेलता है।
यह व्यवहार न केवल अवैध है बल्कि संकेत देता है कि काउंसलिंग को जानबूझकर अविश्वसनीय बनाया जा रहा है ताकि निजी संस्थानों को लाभ मिल सके।
🔴 NOC के लिए पैसों की मांग—अब खुला रहस्य
NSUI ने अपने ज्ञापन में कहा—
“NOC के लिए पैसों की मांग DME में आम प्रथा बन चुकी है।”
फाइलें रोकी जाती हैं
“बात करने” का संकेत मिलता है
और कई छात्रों ने भुगतान की मांग की शिकायत की है
ई-मेल रोकना + NOC रोककर वसूली =
काउंसलिंग के सबसे संवेदनशील हिस्से पर गैर-अधिकृत नियंत्रण।
🔴 NEET फर्जी दस्तावेज़ घोटाला — अब तार रीवा मेडिकल कॉलेज से जुड़े
पिछले दो वर्षों में 50 से अधिक फर्जी दस्तावेज़ पकड़े गए, लेकिन रीवा मेडिकल कॉलेज ने केवल दो मामलों में FIR दर्ज की। इससे बड़ा सवाल उठता है—
MGM इंदौर के फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में आज तक FIR क्यों नहीं?
रीवा मेडिकल कॉलेज का नाम सामने आना संकेत देता है कि कोई बड़ा और सुनियोजित नेटवर्क सक्रिय है। यही नेटवर्क काउंसलिंग प्रक्रियाओं में भी हस्तक्षेप करता दिख रहा है।
🔴 रीवा से अटैच वही कर्मचारी — हर संदेह की जड़
आरोपों का केंद्र एक ही कर्मचारी है—
मेडिकल एजुकेशन कैडर का नहीं, फिर भी कोर काउंसलिंग कार्य सौंपा गया
DME ईमेल, सीट मैट्रिक्स, NOC सेक्शन तक पहुँच
लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं
उस पर प्रशासनिक और राजनीतिक संरक्षण का संदेह
छात्र कहते हैं—
“यदि यह कर्मचारी हट जाए तो आधी अनियमितताएँ तुरंत उजागर हो जाएँगी।”
🔴 हाई कोर्ट में बढ़ते केस: प्रशासनिक विफलता की खुली पोल
पिछले तीन वर्षों में हाई कोर्ट में NEET काउंसलिंग से जुड़े मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। हर साल प्रक्रियाओं पर कई याचिकाएँ दायर होती हैं, जिससे काउंसलिंग बाधित होती है और हजारों छात्रों का एडमिशन अटक जाता है।
गौरतलब है—
यदि प्रक्रिया पारदर्शी और सुचारु होती, तो इतने केस कभी नहीं लगते।
विशेषज्ञों के अनुसार—
बार-बार कोर्ट जाना बताता है कि प्रक्रिया पर भरोसा खत्म हो चुका है
पिछले दो वर्षों में इतने मुकदमे प्रशासनिक व्यवस्था की सीधी नाकामी दर्शाते हैं
सुधार के आदेशों के बाद भी गड़बड़ियाँ दोहराई जाना नीयत पर सवाल खड़े करता है
🔥 क्या यह सब एक संगठित और संरक्षित घोटाला है?
फर्जी दस्तावेज़, ई-मेल हटाना, सीट हेराफेरी, निजी कॉलेजों को लाभ और संदेहास्पद कर्मचारियों को संरक्षण — इन सभी को जोड़कर देखने पर यह स्पष्ट होता है कि यह सब बिना मजबूत राजनीतिक एवं प्रशासनिक संरक्षण संभव नहीं।
🟠 NSUI और छात्रों की संयुक्त माँगें
विवादित कर्मचारी को तुरंत हटाया जाए
DME ई-मेल की डिजिटल फोरेंसिक जाँच
Stray Round और NOC की SIT जाँच
संदिग्ध अलॉटमेंट रद्द किए जाएँ
जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR दर्ज की जाए
NEET काउंसलिंग विवाद अब एक प्रशासनिक गलती का विषय नहीं रहा। यह मामला—
फर्जी दस्तावेज़ नेटवर्क + काउंसलिंग हेराफेरी + निजी कॉलेजों की सेटिंग + सिस्टम पर गैर-अधिकृत कब्ज़ा
—जैसे तत्वों के संयोजन से बना एक संगठित घोटाला प्रतीत होता है।
अब सवाल यह है—
क्या राज्य सरकार यह नेटवर्क तोड़ने के लिए कठोर कार्रवाई करेगी, या यह घोटाला आगे और गहराई तक बढ़ेगा?

राशिफल 25 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रही आर्थिक आज़ादी की नई राह
एक्सटेंशन रिफॉर्म (आत्मा) योजना से गोविंद जायसवाल की बढ़ी आमदनी
टीकमगढ़ के डायल 112 हीरोज: दो एफआरव्ही वाहनों की त्वरित मदद से 12 घायलों को पहुँचाया अस्पताल
सामुदायिक पुलिसिंग से बाल विवाह रोकने में मिलीं मध्यप्रदेश पुलिस को सफलताएं